स्वच्छता के सेनापति थे डाॅ. विन्देश्वर पाठक, डाॅ. पाठक को ‘भारतरत्न’ प्रदान करने की अपील

Dr. Pathak
18 अगस्त, 2023 को स्वर्गीय डाॅ. विन्देश्वर पाठक के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया द्वारा गूगल मीट के माध्यम से एक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें सदस्यों ने डाॅ. पाठक के कार्यों एवं योगदानों को याद किया। ध्यातव्य है कि विगत 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर झंडोत्तोलन के पश्चात् तबीयत खराब होने की स्थिति में दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डाॅ. शिव शंकर अवस्थी ने कहा कि डाॅ. पाठक स्वच्छता के सेनापति थे। उन्होंने बताया कि वे लगभग 20 वर्षों से अधिक समय के लिए ऑथर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के के अध्यक्ष रहे और बाद में संरक्षक के रूप में अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका अदा की। वे न सिर्फ एक समाजसेवी थे, अपितु कई पुस्तकों के लेखक भी थे।
संस्था की उपाध्यक्ष डॉ. सरोजिनी प्रीतम ने अपनी कविता के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें ‘वंचितों का मसीहा’ और ‘दुर्लभ को सुलभ’ करनेवाला बताया। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अहिल्या मिश्रा ने कहा कि श्री पाठक ने अछूत शब्द को अपने शब्दकोश से निकाला। उनके कार्य सामाजिक, साहित्यिक एवं वैयक्तिक तौर पर मील के पत्थर साबित हुए।
सभा में शोक व्यक्त करते हुए डॉ. राकेश पाण्डेय ने यह बताया कि वे सिर्फ सुलभ के संस्थापक नहीं, अपितु साहित्य के सच्चे सेवक भी थे, जिन्होंने सदैव लेखकों को संबल प्रदान किया। डॉ. सविता चड्डा ने उनकी विनम्रता को याद करते हुए यह कहा कि बड़ा दिखना और लोगों के दिलों में बड़ा होना दोनों अलग बाते हैं। उनका व्यक्तित्व सचमुच बहुत विराट् था।
अपने अध्यक्षीय संबोधन में डॉ. श्याम सिंह शशि ने कहा कि “हमने गांधी को नहीं देखा, लेकिन गांधी के पदचिह्नों पर चलनेवाले पाठक जी को अवश्य देखा।” एक प्रसंग को याद करते हुए उन्होंने बताया कि वे कहा करते थे कि कोई किसी को नहीं देता, हम तो सिर्फ उस ईश्वर के माध्यम मात्र हैं।
पूर्व में सुलभ इंटरनेशनल से लंबे समय तक जुड़े रहनेवाले एवं वर्तमान में बीएचयू के हिंदी विषय के प्राध्यापक डॉ. अशोक कुमार ज्योति ने यह बताया कि वे एक उत्कृष्ट प्रबंधक भी थे। जो ठान लिया, उसे वे पूरा करके ही मानते थे। साथ ही वे एक उत्कृष्ट संपादक भी थे। उनका ध्यान हर शब्दों पर होता था। अपने लिए प्रेषित किए गए हर पत्र को वे पढ़ते थे। उन्हें भेजे गए पत्र कभी अनुत्तरित नहीं रहे। साथ ही, जिस भाषा में पत्र मिलता था, उसे समझते थे और उसी भाषा में उत्तर देते थे।
हैदराबाद से रमा द्विवेदी ने बताया कि ऐसी महान् आत्माएँ कई शताब्दियों के बाद जन्म लेती हैं। उनकी विनम्रता, सरलता एवं सहजता को याद करते हुए डॉ. राहुल ने कहा कि उनके कार्यों के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिलना चाहिए। विदित हो कि डॉ. राहुल ने उनपर केंद्रित एक प्रबंध काव्य ‘विन्देश्वर विभा’ भी लिखा है।
जबलपुर की डॉ. उषा दूबे ने उनके व्यक्तित्व को बहुआयामी बताते हुए उन्हें हरिमिलन में तल्लीन हरि का भक्त कहा। दिल्ली की प्रो. निर्मल ने कहा कि उनके पदचिह्नों पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी। हैदराबाद की कवयित्री डॉ. ज्योति नारायण ने बताया कि सचमुच वे बड़े हृदय वाले थे और सभी से प्यार करते थे।
नागपुर के वरिष्ठ लेखक डॉ. नरेंद्र परिहार ने बताया कि उनका व्यक्तित्व विशाल था। उनके कार्यों को देखते हुए न्यूयाॅर्क के मेयर ने वहाँ 14 अप्रैल, 2016 को ‘विन्देश्वर पाठक दिवस’ के रूप में मनाया। उन्होंने सभा के समक्ष यह विचार रखा कि साहित्यकारों के द्वारा यह प्रस्ताव रखा जाए कि भारत सरकार द्वारा डॉ. पाठक को भारत रत्न के अलंकरण से विभूषित किया जाए।
डॉ. हरिसिंह पाल सिंह ने उन्हें श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए कहा कि वे सदा हमारे दिल में रहेंगे। वे साहित्यकारों के सच्चे हितैषी और महान् कविहृदय थे। डॉ. युवराज सिंह ने कहा कि उन्होंने जो कार्य किए हैं, वे लंबे समय तक हम सबका मार्गदर्शन करेंगे।
श्रद्धांजलि समारोह में कामना श्रीवास्तव, संदीप कुमार शर्मा, एहसान हसन, अनीता तिवारी, आशा मिश्रा ‘मुक्ता’, सुरेश ढींगरा, सुदेश भाटिया, कामकोटि कृष्ण कुमार, प्रभा शर्मा, शशीधर, प्रदीप कुमार, अमित कुमार, प्रजापति रेणुका कैलास, दीपिका दास इत्यादि देशभर के लेखक-कवि उपस्थित थे।
प्रस्तुति : सुशांत कुमार पांडेय
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